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Loss of Depawali

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1.दीपावली कब और क्यों मनायी जाती है:- दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनायी जाती है यह भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है।इस दिन विष्णु अवतार श्रीराम 14वर्ष का वनवास काट कर घर आये थे।तो लोगों ने घी के दीपक जलाकर स्वागत किया था । 2.दीपावली के नाम पर ध्वनि प्रदूषण :- दिवाली पर ध्वनि प्रदूषण भी है गंभीर समस्या ध्वनि प्रदूषण हर साल बढ़ता ही जा रहा है।अधिक शोर रहने से लोगों में बहरापन, कान दर्द, कान में झनझनाहट, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द जैसी शिकायतें बढ़ती हैं। इस वजह से तनाव और डिप्रेशन के मामले भी बढ़ते हैं। ध्वनि प्रदूषण भी बहुत अधिक परेशान करता है। दिवाली के तुरंत बाद कान की समस्याएं भी शुरू हो जाती है। 3.दीपावली के नाम पर फिजूलखर्ची:-  प्रति वर्ष दीपावली पर करोड़ों रुपयों का व्यापार होता है यह सिलसिला कई दिनों तक चलता है यह दीपावली पर एक तरह की फिजूलखर्ची है कुछ लोग इसे परंपरा से जोड़कर देखते हैं  पटाखों से बसाहतों और ग्रामीण इलाकों तथा औद्योगिक स्थानों की हवा में तांबा ,गंधक, कैल्शियम, और बेरियम ,प्रदूषण फैलाते हैं। 4.पटाखों के अंधाधुंध प...

Loss of bolywood

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पूर्व काल में लोगों के मनोरंजन के साधन ढोलक,मंजीरा,ताल,रावण हत्था जैसे वाद्ययंत्रो का प्रयोग करके लोगों का मंनोरंजन करते तथा अपनी रोजी रोटी भी कमाते थे। जो लोग मनोरंजन का काम करते थे।वे भारतीय संस्कृति व परम्परा की मर्यादा का पुरा ध्यान रखते थे। उनके तरो-तरीको से भारतीय संस्कति बहुत ही रंगीन व उन्नत होती चली गयी। 2.बॉलीबुड का आवागम: - जैसे ही भारतीय संस्कृति में बॉलीबुड का आगमन हुआ भारतीय संस्कृति का पूर्ण रूप से पाश्चात्यकरण हो गया है जैसे:-युवाओं द्वारा छोटे कपड़े व फटे कपड़े पहनना,अपने आप में अश्लीलता दर्शाता है। 2. युवाओं का नैतिक पतन:- युवाओं की रूचि सिर्फ नाटक,फिल्म,मूवी में बढ़ता जा रहा है। जैसे फिल्मों के हिरो करते है वैसी ही लाइफ युवा जीते है। 3.बॉलीबुड ने देश बिगाड़ा:- बॉलीबुड की फिल्मों,नाटक,के लत से युवा पीढ़ी अपनी पढाई व फर्ज पर ध्यान नहीं देती है। 4.बॉलीबुड की फिल्मी दुनिया ने बच्चों को नास्तिक बना दिया ।जिससे बच्चो में दया भाव खत्म हो चुका है। 5.भारतीय संस्कृति का बचाव:- संत रामपाल जी महाराज के शास्त्रप्रमाणित ज्ञान व सतभक्ति से...

Benefit and Loss of mobile phon

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आज के दौर में मोबाइल फोन का हमारे जीवन में अहम भुमिका है। अमीर हो या गरीब सभी फोन से जुड़े है। लोग फोन के बिना तो जीना भी पंसद नहीं करते है। फोन चलाना एक लत सी बन गयी है।  मोबाइल फोन के नुकसान:- 1. यदि फोन टूट जाये तो इसमें सेव सब सामग्री बर्बाद हो जाती है। 2.इससे निकलने वाली रेडिएशन से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 3.फोन से इंसान में अश्लीलता फैलती है। 4.फिजुल खर्च बढ़ जाती है। मेंहगे रिचार्च करवाने से। 5.अधिक बात करने से कान,दिमाग पर दुष्प्रभाव पड़ता है 6.विद्यार्थीवर्ग का भारी नुकसान होता है। वे मोबाइल में अनावश्यक समय बर्बाद करते है। 7.मोबाइल से आंखों की रोशनी चली जाती है। मोबाइल फोन के लाभ :- 1.मोबाइल फोन के जरिये हम किसी भी समय किसी से भी बात करके अपनी सुचना को आगे पहुंचा सकते। 2.फोन मंनोरंजन का साधन है 3.समाचार प्राप्त होते है। 4.आप अपने माोबाइल कैमरा से फोटो या वीडियो खीच सकते है। 5.अगर आप को किसी से बात करना हो तो बिना फोन नंबर याद रखे कॉल कर सकते है। 6.मोबाइल फोन bluetooth सुविधा से फोटो, वीडियो, गाना, डेटा अन्य मोबाइल फोन पर भेज सकते है ...

Benifit of Environment

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1.पर्यावरण और मानव का संबंध पर्यावरण पर निबंध हमारे चारों ओर जो कुछ है तथा चारों ओर से हमें घेरे हुएं हैं उसे हम पर्यावरण से संदर्भित करते हैं। ... प्राकृतिक पर्यावरण में पेड़, झाड़ियाँ, बगीचा, नदी, झील, हवा इत्यादि शामिल हैं। प्रचीन मानव प्रकृति के समीप निवास करते थे, इस कारणवश वह स्वस्थ रहते और ज्यादा दिन तक जीवित रहते थे। 2.पर्यावरण का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। मनुष्य एक पल भी इसके बगैर नहीं रह सकता। ... प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जल ,थल, वायु, अग्नि, आकाश इन्हीं पांच तत्वो से ही मनुष्य का जीवन है,और जीवन समाप्त होने पर वह इन्हीं में विलीन हो जाता है। 3.  जिस प्रकार पर्यावरण के बिना हमारा अस्तित्व नहीं उसी प्रकार सच्चे गुरू के बिना जीवन का कोई महत्व नहीं है। श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15श्लोक 1-4,16,17में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग बता देगा वह पूर्ण गुरू /सच्चा सद्गुरू है। यह तत्वज्ञान केवल संत रामपाल जी महाराज ही बता रहे है। संत रामपाल जी महाराज जी ने सभी धार्मिक शास्त्रों से प्रमाणि...

गुरू को भगवान क्यों माने

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1.पवित्र वेदों व गीता जी आदि पवित्र सदग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है व अधर्म की वृद्धि होती है तब परमेश्वर स्वयं आकर या अपने परम संत यानी सच्चे सतगुरु को भेजकर सत्य ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनर्स्थापना करता है। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज द्वारा ही सत्य ज्ञान दिया जा रहा है। 2.श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 - 4, 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग बता देगा वह पूर्ण गुरु/सच्चा सद्गुरु है। यह तत्वज्ञान केवल संत रामपाल जी महाराज ही बता रहे हैं। 3.यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25 के अनुसार तत्वदर्शी संत वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन  करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है।  ऐसा केवल संत रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं। 4.पूर्ण संत तीन प्रकार के मंत्रों को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ 265 पर बोध सागर में मिलता है। गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या 822 में मिलता है। संत रामपाल जी महाराज ही वह पूर्ण संत ह...

BibIe

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https://www.youtube.com/user/satlokashram001 1.पवित्र बाईबल में भगवान का नाम कबीर है- अय्यूब 36:5।यहां स्पष्ट है की कबीर ही शक्तिशाली परमात्मा है। 2.मांस खाना परमेश्वर का आदेश नहीं। पवित्र बाईबल (उत्पति ग्रन्थ 1:29) 3.अय्यूब 36:5(और्थोडोक्स यहूदी बाइबल -OJB) परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली)है,किन्तु वह लोगों से घृणा नहीं करता है। परमेश्वर कबीर (सामर्थी)है और विवेकपूर्ण है। 4.हजरत ईसा मसीह की मृत्यु 30 वर्ष की आयु में हुई जो पूर्व ही निर्धारित थी।स्वयं ईसा जी ने कहा कि मेरी मृत्यु निकट है तथा तुम शिष्यों में से ही एक मुझे विरोधियों को पकड़वाएगा और वो मुझे मार देंगे।इससे सिद्ध है हजरत ईसा जी ने कोई चमत्कार नहीं किया ये सब पहले से ही निर्धारित था। 5.ईसा मसीह की मृत्यु के तीसरे दिन स्वयं पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ही आये थे भक्ति की लाज रखने के लिए ।अन्यथा काल ब्रह्म भगवान से विश्वास ही उठा देता लोगों का। 6.बाइबिल में जिसका प्रमाण है वह परमात्मा भारत की धरती पर आ चुके है।

kabir is God

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1.कबीर परमेश्वर का शरीर हाड़ मांस से बना नहीं है।वह अविनाशी परमात्मा है।कबीर परमात्मा जन्म-मृत्यु से रहित है,अर्थात अविनाशी है।वे सशरीर प्रकट हुए। 2.कबीर परमात्मा का जन्म माँ के गर्भ से नहीं होता।वह स्वयं सतलोक से सशरीर आते है अपना तत्वज्ञान देने और मोक्ष प्रदान करने। 3.कबीर साहेब प्राकाटय ऋग्वेद मण्डल9सूक्त1मंत्र9में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरूष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कुंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है। 4. काशी में एक लहरतारा तालाब था। उस तालाब में बड़े- 2 कमल के फूल उगे हुए थे। नीरू- नीमा नि: सन्तान दम्पत्ति थे ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 सन् 1398 में कबीर साहेब कमल के फूल पर शिशु रूप में परमात्मा प्रकट हुऐ।