Loss of Depawali
1.दीपावली कब और क्यों मनायी जाती है:-
दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनायी जाती है यह भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है।इस दिन विष्णु अवतार श्रीराम 14वर्ष का वनवास काट कर घर आये थे।तो लोगों ने घी के दीपक जलाकर स्वागत किया था ।
2.दीपावली के नाम पर ध्वनि प्रदूषण :-
दिवाली पर ध्वनि प्रदूषण भी है गंभीर समस्या
ध्वनि प्रदूषण हर साल बढ़ता ही जा रहा है।अधिक शोर रहने से लोगों में बहरापन, कान दर्द, कान में झनझनाहट, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द जैसी शिकायतें बढ़ती हैं। इस वजह से तनाव और डिप्रेशन के मामले भी बढ़ते हैं। ध्वनि प्रदूषण भी बहुत अधिक परेशान करता है। दिवाली के तुरंत बाद कान की समस्याएं भी शुरू हो जाती है।
3.दीपावली के नाम पर फिजूलखर्ची:-
प्रति वर्ष दीपावली पर करोड़ों रुपयों का व्यापार होता है यह सिलसिला कई दिनों तक चलता है यह दीपावली पर एक तरह की फिजूलखर्ची है कुछ लोग इसे परंपरा से जोड़कर देखते हैं पटाखों से बसाहतों और ग्रामीण इलाकों तथा औद्योगिक स्थानों की हवा में तांबा ,गंधक, कैल्शियम, और बेरियम ,प्रदूषण फैलाते हैं।
4.पटाखों के अंधाधुंध प्रयोग से मस्तिक पर मानसिक दुष्प्रभाव:-
दरअसल इन पटाखों में जिन रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है वह बेहद खतरनाक है। पटाखों की ध्वनि से व्यक्ति बहरा हो जाता है तथा व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ होता है
5.दीपावली शास्त्रविरूद्ध साधना :-
दीपावली मनाने का विधान हमारे पवित्र धार्मिक ग्रंथ गीता जी में कहीं भी प्रमाण नहीं है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि दीपावली पूर्ण रूप से शास्त्रविरुद्ध है।शास्त्र विरूद्ध होने से मानव के लिए हितकारी नहीं है।6.गलत रीतिरिवाज व परम्पराओं से मानव समाज पर दुष्प्रभाव:-
हमारी रूढ़िवादी परम्पराओ ने मानव समाज का जीवन दुविधा में डाल दिया है।उदाहरण के तौर पर मृत्यु भौज,दहेज प्रथा,जन्मदिन को त्योहार की तरह मनाना,पुत्र प्राप्ति को अनिर्वाय मानना, शास्त्र विरुद्ध साधना करना,पत्थर पूजा,शिक्षितसमाज होकर भी शास्त्र प्रमाण को महत्व नहीं देते है।
7.पूर्ण परमात्मा की भक्ति से सम्पूर्ण आध्यात्मिक लाभ व पाखण्ड से मुक्ति :-
Comments
Post a Comment