मानव और पर्यावरण
मानव और पर्यावरण का संबंध:-
वर्तमान समय में युवा पीढ़ी में पाश्चात्य संस्कृति का अधिक प्रभाव देखने को मिलता है जिसे की बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमना, नशा करना ,ऊंची आवाज में गाने सुनना,आदिआदि। युवाओं की ऐसी आदतों ने न केवल मानव समाज को दूषित किया है बल्कि पर्यावरण पर भी घातक प्रभाव डाला है जिसके फलस्वरूप हमारा वातावरण बहुत अधिक दूषित हो गया है इंसान अपने स्वार्थ के लिए प्राणवायु दाता वृक्षों को काटकर अपने स्वार्थ के लिए काम में ले रहा है।इंसान की सोच संकीर्ण होती जा रही है।दूसरों की भलाई करना ,पर्यावरण को शुद्ध रखना तो माना भूल ही गया हो।
मानव द्वारा पर्यावरण को क्षति
पर्यावरण को मुख्य खतरा किसी और से नहीं बल्कि मनुष्य से ही है मनुष्य का प्रकृति के साथ खिलवाड़ के कारण ही पर्यावरण के विभिन्न प्रदूषण होते जा रहे हैं उदाहरण के तौर पर वायु प्रदूषण ,जल प्रदूषण,ध्वनि प्रदूषण आदि । मनुष्य द्वारा पेड़ो की अविवेकपूर्ण कटाई से हरियाली घट रही है जिसे वर्षा का कम होना इससे अनेक प्रकार की प्राकृतिक घटनाएं घटित हो रही है इसी प्रकार जल,वायु व ध्वनि प्रदूषण आदि पर्यावरण के जो तत्व है वे भी प्रदूषित हो रहे हैं
पर्यावरण संरक्षण में आध्यात्मिकता का महत्व
भगवान में विश्वास करने वाले व्यक्ति समाज सेवक होते है।सबका भला सोचना उनका उद्देश्य होता है।इस प्रकार का व्यक्ति पशु-पक्षी व पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होता है,पर्यावरण संरक्षण में अपना अहम योगदान देता है।ऐसा व्यक्ति बाहरी दिखावे में विश्वास नहीं करता ।प्राचीन समय ने अमृताबाई बिश्नोई समुदाय से संबंध रखने वाली महिला ने जाभोजी के ज्ञान आधार से पेड़ो को बचाने के लिए अपने प्राणों की वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से मानव समाज में जागरूकता आ रही है।वे नशा मुक्त ,दहेज मुक्त शादियां कर रहे है।संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से मानव समाज व्यर्थ की धन की दौड़ को छोड़कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपना अहम योगदान दे रहे है।
https://www.jagatgururampalji.org/hi/
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